लखनऊ न्यूज डेस्क: उन पर इमारतें खड़ी करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि जालसाज ऐसे प्लॉट खोजते थे, जिनके असली मालिक लंबे समय से निष्क्रिय थे। फिर वे फर्जी कागजात तैयार कर नकली मालिक बनाकर प्लॉटों की रजिस्ट्री करा लेते थे। खासकर एलडीए की कॉलोनियों में इस तरह की धांधली बड़े पैमाने पर हुई है। मौके पर जांच करने पर पता चला कि इन प्लॉटों पर कई दो से तीन मंजिला इमारतें खड़ी हो चुकी हैं।
विशेष खंड दो, वास्तु खंड तीन और विनम्र खंड एक में जांच के दौरान सामने आया कि कई फर्जी ढंग से बेचे गए प्लॉटों पर बड़ी इमारतें बनी हैं। प्लॉट नंबर 2/63 पर दो मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग तैयार हो चुकी है, जबकि ठीक सामने प्लॉट नंबर 2/73 पर झोपड़ी बनी मिली। वहीं, प्लॉट 2/88 पर शानदार तीन मंजिला मकान बन चुका है, जिसमें परिवार रह रहा है।
वास्तु खंड में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली। प्लॉट नंबर 3/560 पर दो मंजिला और प्लॉट 3/583 पर तीन मंजिला इमारत तैयार है। इन दोनों जगहों पर लोग रह भी रहे हैं। वहीं, प्लॉट नंबर 3/645 और 3/663 अभी खाली पड़े हैं, लेकिन इन्हें भी फर्जी कागजात के जरिए बेचा जा चुका है।
विनम्र खंड में प्लॉट संख्या 1/275 पर दो मंजिला मकान बन चुका है और वहां परिवार रह रहा है। वहीं, नजदीक के प्लॉट 1/266 पर भी दो मंजिला इमारत बनी है, लेकिन वह बंद पड़ी हुई है। एसटीएफ की जांच में अब तक कुल 126 ऐसे प्लॉट सामने आ चुके हैं, जिन्हें फर्जी कागजात के जरिए बेचा गया। इसके अलावा गिरोह में शामिल अन्य जालसाजों की भी तलाश की जा रही है।
इस मामले में एसटीएफ ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 23 प्लॉटों के फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि जालसाज एलडीए की फाइलों से असली मालिकों के आधार और पैन कार्ड की कॉपी चुरा लेते थे। इसके बाद स्कैनर की मदद से फर्जी आधार कार्ड बनाकर प्लॉट बेच देते थे। अब एसटीएफ यह भी जांच कर रही है कि एलडीए के किन अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा था।