लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ और कानपुर के बीच का सफर अब एक 'कॉफी ब्रेक' जितना छोटा होने वाला है। भारी ट्रैफिक और खराब सड़कों से जूझने वाले यात्रियों के लिए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बड़ी राहत लेकर आ रहा है। इसके पूरी तरह चालू होने के बाद, दोनों शहरों के बीच की दूरी महज 35 से 40 मिनट में तय की जा सकेगी, जिसमें वर्तमान में लगभग दो घंटे या उससे अधिक का समय लगता है।
परियोजना की लागत और ढांचा:
लगभग 3,600 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे के विकास में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। इसे दो मुख्य खंडों में विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य न केवल कनेक्टिविटी सुधारना है, बल्कि क्षेत्रीय व्यापार और लॉजिस्टिक्स को भी गति देना है। मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा इसके उद्घाटन की संभावना जताई जा रही है।
टोल दरों को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया:
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक्सप्रेसवे के लिए टोल दरें फाइनल कर दी हैं, जिन्हें लेकर यात्रियों के बीच चर्चा तेज है। रिपोर्ट के अनुसार, राउंड-ट्रिप के लिए 415 रुपये का टोल तय किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि टोल और ईंधन के खर्च को मिलाकर एक निजी कार का सफर 1000 रुपये से ऊपर जा सकता है। जहां कुछ लोग समय की बचत के लिए इसे सही मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे महंगा बता रहे हैं।
आर्थिक और क्षेत्रीय लाभ:
NHAI के अधिकारियों का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे दो बड़े औद्योगिक और प्रशासनिक केंद्रों को जोड़कर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा। फिलहाल एक्सप्रेसवे पर वाहनों का ट्रायल रन शुरू हो चुका है और उद्घाटन के तुरंत बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। बेहतर सड़क गुणवत्ता और सुगम यात्रा के कारण यह मार्ग भविष्य में लखनऊ और कानपुर के बीच का पसंदीदा रूट बनने की ओर अग्रसर है।