लखनऊ न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को कुदरत का दोहरा रूप देखने को मिला, जहाँ एक ओर भीषण गर्मी से तप रहे शहरों को राहत मिली, वहीं दूसरी ओर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी। लखनऊ, ललितपुर, अयोध्या और झांसी सहित 25 से अधिक जिलों में तेज आंधी के साथ हुई बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। ललितपुर में तो ओलों की इतनी भारी बारिश हुई कि जमीन पर सफेद चादर बिछ गई, जिससे गेहूं, सरसों और सब्जियों की तैयार फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं।
राजधानी लखनऊ में सुबह की शुरुआत धूप के साथ हुई थी, लेकिन 10 बजते ही अचानक आसमान में अंधेरा छा गया और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। इस मौसमी बदलाव के कारण लखनऊ के अधिकतम तापमान में 10.3 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे पारा लुढ़ककर 27 डिग्री पर आ गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि शनिवार को भी बादल छाए रहेंगे और तापमान इसी के आसपास बना रहेगा। प्रयागराज, मथुरा और काशी जैसे शहरों में भी आंधी-पानी ने यातायात और बाजारों की रफ्तार रोक दी।
इस प्राकृतिक आपदा के बीच एक दर्दनाक पहलू भी सामने आया, जहाँ प्रयागराज, बलरामपुर, बहराइच और मिर्जापुर में आकाशीय बिजली गिरने से 5 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 3 किसान शामिल थे। खेतों में खड़ी फसलें गिरने से किसानों में हाहाकार मचा है; गोंडा में पत्तागोभी और अन्य जिलों में आलू व सरसों की फसलें पानी में डूब गई हैं। फसल की बर्बादी देख कई किसान खेतों में ही रो पड़े, क्योंकि उनकी महीनों की मेहनत और पूंजी मिट्टी में मिल गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण हुआ है। अगले दो दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बारिश होने की संभावना बनी रहेगी। पिछले 24 घंटों में मथुरा में हवा की गति सबसे अधिक 87 किमी प्रति घंटा रिकॉर्ड की गई, जबकि बागपत और बुलंदशहर में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज हुई। विभाग ने चेतावनी दी है कि फिलहाल दो दिन और सावधानी बरतने की जरूरत है।