लखनऊ न्यूज डेस्क: भारत में बुलेट ट्रेन नेटवर्क का विस्तार उत्तर भारत की कनेक्टिविटी और अर्थव्यवस्था को बदलने के लिए तैयार है। केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर लखनऊ से होकर गुजरेगा, जिससे प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय में क्रांतिकारी कमी आएगी।
यात्रा समय में संभावित बदलाव:
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इस हाई-स्पीड नेटवर्क के शुरू होने से निम्नलिखित बदलाव देखने को मिल सकते हैं:
दिल्ली से लखनऊ: वर्तमान में सबसे तेज़ ट्रेन (वंदे भारत) से 6 घंटे 25 मिनट लगते हैं, जो बुलेट ट्रेन से घटकर मात्र 2 घंटे रह जाएगा।
दिल्ली से वाराणसी: यह दूरी तय करने में अब केवल 3 घंटे 50 मिनट का समय लगेगा।
अन्य रूट: मुंबई-पुणे के बीच सफर मात्र 28 मिनट, पुणे-हैदराबाद 1 घंटा 55 मिनट और हैदराबाद-बेंगलुरु के बीच यात्रा 2 घंटे में पूरी हो सकेगी।
आर्थिक और क्षेत्रीय प्रभाव:
रेल मंत्री ने बताया कि यह नेटवर्क वाराणसी-पटना और वाराणसी-लखनऊ जैसे क्षेत्रों को एक 'एकीकृत आर्थिक बेल्ट' में बदल देगा। बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार, व्यवसाय और औद्योगिक केंद्रों तक पहुंच आसान होगी। इसके अलावा, कम समय लगने के कारण बुलेट ट्रेन भविष्य में छोटी दूरी की हवाई यात्राओं (Short-haul flights) की जगह ले सकती है।
परियोजना की वर्तमान स्थिति:
सरकार ने नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) को उन सात नए कॉरिडोर पर काम तेज करने का निर्देश दिया है, जिनकी घोषणा बजट 2026-27 में की गई थी। वर्तमान में रेलवे बोर्ड ने इन परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) को संशोधित करने के लिए कहा है। इसके साथ ही, भारत की पहली बुलेट ट्रेन (मुंबई-अहमदाबाद) का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है।
भारत की यह दीर्घकालिक परिवहन रणनीति न केवल यात्रा के पैटर्न को बदलेगी, बल्कि शहरों के बीच की दूरियों को कम कर आर्थिक विकास की नई राहें खोलेगी।