लखनऊ न्यूज डेस्क: राजधानी लखनऊ में खुद को एटीएस अधिकारी बताकर दंपती को “डिजिटल अरेस्ट” करने और करीब 90 लाख रुपये ठगने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ताजा कार्रवाई में साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने दो और आरोपितों को दबोचा है। इससे पहले तीन आरोपितों को 17 फरवरी को पकड़ा गया था।
पुलिस के मुताबिक गिरोह का नेटवर्क Jaipur से संचालित हो रहा था। पहले गिरफ्तार किए गए आरोपितों में गोरखपुर निवासी मयंक श्रीवास्तव, गाजियाबाद निवासी इरशाद और दिल्ली निवासी मनीष कुमार शामिल थे। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने Sikar निवासी मनोज यादव और जितेंद्र यादव उर्फ जीतू को भी गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि ये लोग वैभव श्रीवास्तव नामक शख्स के निर्देश पर बैंक खातों और पैसों के लेन-देन का काम संभालते थे।
गिरोह लोगों को सोशल मीडिया और कॉल के जरिए निशाना बनाता था। खुद को सरकारी अधिकारी बताकर भरोसा जीतने के बाद आतंकवाद या मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी दी जाती थी। डर का माहौल बनाकर रकम आरटीजीएस के जरिए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। फर्जी दस्तावेज और सुप्रीम कोर्ट के नकली आदेश भेजकर पीड़ितों पर मानसिक दबाव बनाया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के तार चीन और कंबोडिया तक जुड़े हैं। पुलिस के अनुसार कुछ सदस्य विदेश से नेटवर्क संचालित कर डिजिटल करेंसी के माध्यम से रकम ट्रांसफर करते थे। 26 जनवरी 2026 को वीना बाजपेयी को कॉल कर खुद को एटीएस इंस्पेक्टर बताने वाले ठगों ने 29 जनवरी से 9 फरवरी के बीच करीब 90 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। 11 लाख रुपये और मांगने पर पीड़ित परिवार को धमकियां भी दी गईं। फिलहाल पुलिस मुख्य सरगना और अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।