लखनऊ न्यूज डेस्क: राजधानी लखनऊ में इन दिनों भीषण गर्मी और बिजली संकट ने मिलकर आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। शहर का तापमान लगातार 42°C के आसपास बना हुआ है, जिससे एसी और कूलरों के अत्यधिक प्रयोग के कारण बिजली की मांग में भारी उछाल आया है। आलम यह है कि मुख्यमंत्री आवास के पास स्थित शहर के सबसे प्रमुख वीवीआईपी इलाके हजरतगंज में भी घंटों बिजली गुल रह रही है, जिससे प्रशासन और बिजली विभाग के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है।
बिजली की इस अनियमित कटौती का सबसे गहरा असर हजरतगंज के व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि भीषण गर्मी के कारण बिना एयर कंडीशनिंग के ग्राहक दुकानों में रुकना पसंद नहीं कर रहे हैं, जिससे कारोबार में भारी गिरावट आई है। साथ ही, बार-बार ट्रिपिंग और लो वोल्टेज के कारण डिजिटल भुगतान की मशीनों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के खराब होने का डर बना रहता है, जिसने दुकानदारों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
आम नागरिकों के लिए यह गर्मी और बिजली की किल्लत दोहरी मार की तरह है। रात के समय घंटों तक बिजली गायब रहने से बुजुर्गों, बीमारों और छोटे बच्चों को असहनीय परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में बिजली संकट के कारण पानी की सप्लाई भी बाधित हो रही है, क्योंकि ट्यूबवेल चलाने के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पा रही है। स्थानीय लोगों ने विभाग पर पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर और ओवरलोडिंग की समस्या को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अचानक बढ़ी मांग और कुछ तकनीकी खामियों की वजह से आपूर्ति में बाधा आई है, जिसे ठीक करने के लिए टीमें लगातार काम कर रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि लखनऊ की बढ़ती आबादी के अनुरूप ट्रांसफार्मर और पावर लाइनों का समय पर अपग्रेड न होना इस समस्या की मुख्य जड़ है। भविष्य में इस संकट से स्थायी निजात पाने के लिए स्मार्ट ग्रिड तकनीक और बिजली उत्पादन क्षमता में वृद्धि को प्राथमिकता देनी होगी।