प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस की मुलाकात 3 अप्रैल को बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान हुई। यह बैठक थाई प्रधानमंत्री पटोंगटार्न शिनवात्रा द्वारा आयोजित आधिकारिक रात्रिभोज के दौरान संपन्न हुई। इस बैठक ने दोनों देशों के संबंधों में नए अवसरों को जन्म दिया।
बैठक का उद्देश्य और महत्व
यह मुलाकात क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। बिम्सटेक, यानी बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, परिवहन और कनेक्टिविटी को बढ़ाना है।
साझा तस्वीर और प्रतीकात्मकता
बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार के आधिकारिक हैंडल पर साझा की गई तस्वीर में दोनों नेता एक ही खाने की मेज पर बैठे नजर आए। यह छवि दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और कूटनीतिक समझ को दर्शाती है।
द्विपक्षीय वार्ता की संभावना
बांग्लादेश के स्थानीय मीडिया के अनुसार, मुख्य सलाहकार के उप प्रेस सचिव अबुल कलाम आज़ाद ने बताया कि दोनों नेताओं ने एक अनौपचारिक बातचीत की, जिससे भविष्य में द्विपक्षीय वार्ता की संभावना प्रबल हो गई। बांग्लादेश सरकार ने इस बैठक के लिए भारत से अनुमति मांगी थी और इस वार्ता से क्षेत्रीय स्थिरता एवं आपसी संबंधों को और मजबूत करने की उम्मीद की जा रही है।
बिम्सटेक की अध्यक्षता और बांग्लादेश की भूमिका
बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान बांग्लादेश को आधिकारिक रूप से इस संगठन की अध्यक्षता सौंप दी जाएगी। इस निर्णय के बाद बांग्लादेश की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी, खासकर आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने में।
रोहिंग्या संकट पर चर्चा
बांग्लादेश में मौजूद रोहिंग्या शरणार्थी संकट एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। बांग्लादेश के प्रधान सलाहकार खलीलुर रहमान ने कहा कि बिम्सटेक के सदस्य देशों के नेता इस विषय पर चर्चा करेंगे। भारत और बांग्लादेश इस समस्या के समाधान के लिए मिलकर प्रयास कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का पत्र और ऐतिहासिक संबंध
पिछले सप्ताह, प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर यूनुस को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने भारत और बांग्लादेश के ऐतिहासिक संबंधों को याद किया। उन्होंने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम को साझा इतिहास का हिस्सा बताते हुए आपसी सहयोग और संवेदनशीलता पर जोर दिया।
भारत की चिंताएँ और वर्तमान स्थिति
नई दिल्ली बांग्लादेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंतित है। अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद, कई कट्टरपंथी तत्वों को रिहा करने की यूनुस सरकार की नीति की आलोचना हो रही है। भारत एक स्थिर और समावेशी बांग्लादेश का समर्थन करता है।
धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले
बांग्लादेश में हिंदू और अहमदिया समुदायों पर हो रहे हमले चिंता का विषय बने हुए हैं। भारत सरकार ने इस मुद्दे को कई बार उठाया है और अंतरिम सरकार द्वारा की जा रही जांच को अपर्याप्त बताया है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी और मुहम्मद यूनुस की मुलाकात ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक नई दिशा प्रदान की है। यह वार्ता केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि भविष्य में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग का संकेत भी है। बिम्सटेक की अध्यक्षता मिलने के बाद बांग्लादेश की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने में भारत की भूमिका भी बढ़ेगी।