महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व नाम औरंगाबाद) में चुनावी सरगर्मियों के बीच राजनीतिक हिंसा का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। शहर के किराडपुरा इलाके में AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के दो गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई सड़क पर उतर आई। टिकट वितरण से नाराज कार्यकर्ताओं ने न केवल पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार का विरोध किया, बल्कि उनके साथ मारपीट भी की, जिससे पूरे इलाके में तनाव फैल गया।
विवाद की जड़: वार्ड नंबर 12 का 'टिकट' युद्ध
महाराष्ट्र में आगामी निकाय चुनावों को लेकर सभी दलों ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज जलील ने दो दिन पहले ही आठ उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। इस सूची में वार्ड नंबर 12 से मोहम्मद इसरार को पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया गया।
पार्टी के इस फैसले से एक धड़ा तो खुश था, लेकिन दूसरा धड़ा बुरी तरह नाराज हो गया। दरअसल, इसी वार्ड से पार्टी के कद्दावर नेता हाजी इसाक भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। समर्थकों को उम्मीद थी कि टिकट हाजी इसाक को मिलेगा, लेकिन मोहम्मद इसरार का नाम सामने आते ही असंतोष की ज्वाला भड़क उठी।
रैली में हंगामा और हिंसक झड़प
विवाद तब शुरू हुआ जब मोहम्मद इसरार के समर्थकों ने टिकट मिलने की खुशी में किराडपुरा इलाके में एक विजय रैली निकाली। जैसे ही यह रैली हाजी इसाक के प्रभाव वाले क्षेत्र में पहुंची, वहां पहले से मौजूद दूसरे गुट के समर्थकों ने रास्ता रोक लिया।
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नारेबाजी से मारपीट तक: शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच केवल नारेबाजी और तीखी नोकझोंक हुई। लेकिन देखते ही देखते मामला हाथ से निकल गया और दोनों गुटों के बीच जमकर लात-घूंसे चले।
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उम्मीदवार को खदेड़ा: आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने आधिकारिक उम्मीदवार मोहम्मद इसरार के साथ धक्का-मुक्की की और उनके समर्थकों को इलाके से खदेड़ दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि उम्मीदवार को अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा।
"पार्टी का नामोनिशान मिटा देंगे" - समर्थकों की चेतावनी
हाजी इसाक के समर्थकों का गुस्सा सिर्फ उम्मीदवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को भी खुली चुनौती दे डाली। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वार्ड के जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पार्टी ने मोहम्मद इसरार की उम्मीदवारी वापस नहीं ली और अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो वे किराडपुरा इलाके से पार्टी का नामोनिशान मिटा देंगे।
यह घटना दर्शाती है कि AIMIM के भीतर टिकट वितरण को लेकर असंतोष गहरा है, जो आने वाले चुनाव में पार्टी की संभावनाओं को नुकसान पहुँचा सकता है।
पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
झड़प की सूचना मिलते ही जिंसी थाने की पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव बरकरार है। पुलिस ने इस मामले में दोनों गुटों के कुछ उपद्रवियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
निष्कर्ष
छत्रपति संभाजीनगर की यह घटना किसी भी राजनीतिक दल के लिए एक बड़ा सबक है कि स्थानीय स्तर पर समन्वय की कमी किस तरह सार्वजनिक अपमान और हिंसा का कारण बन सकती है। AIMIM के लिए अब चुनौती न केवल चुनाव जीतना है, बल्कि अपने ही घर में लगी इस बगावत की आग को शांत करना भी है।