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बिहार चुनाव में जेडीयू को हो सकता है नुकसान! जानें वक्फ बिल के पाॅलिटिकल साइड इफेक्ट

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Posted On:Thursday, April 3, 2025

इन दिनों देश में वक्फ बिल को लेकर राजनीति चरम पर है। बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, और इस विधेयक के प्रभाव से राज्य की राजनीतिक दशा और दिशा तय हो सकती है। हालांकि, 2014 के बाद से मुसलमान मतदाता यह समझ चुके हैं कि अकेले उनका जनमत किसी भी राज्य में सरकार बनाने या गिराने के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है, जबकि जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के लिए यह चुनाव करो या मरो की स्थिति बन सकता है।

बिहार में मुस्लिम वोटरों का प्रभाव

बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 47 ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाता जीत-हार का फैसला कर सकते हैं। इस विधेयक पर अब यह साफ हो गया है कि कौन सी पार्टियां इसके पक्ष में हैं और कौन विरोध में। भारत गठबंधन की सभी प्रमुख पार्टियां इस विधेयक के खिलाफ हैं, जबकि बीजेडी और बीआरएस जैसी कुछ पार्टियां तटस्थ बनी हुई हैं। एनडीए सरकार के लिए इन पार्टियों को समर्थन के लिए मनाना मुश्किल हो सकता है।

छह राज्यों में मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव

अगले एक साल में छह राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं—बंगाल, बिहार, असम, तमिलनाडु और केरल प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन सभी राज्यों में मुस्लिम मतदाता महत्वपूर्ण संख्या में मौजूद हैं।

  • बिहार: 47 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव है। जदयू एनडीए के साथ होने के कारण उसे नुकसान हो सकता है, जबकि राजद को इसका फायदा मिल सकता है। हालांकि, एआईएमआईएम की उपस्थिति समीकरण बदल सकती है।

  • पश्चिम बंगाल: राज्य में 292 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें 60 से अधिक सीटों पर मुस्लिम मतदाता प्रभावशाली हैं। टीएमसी इस विधेयक के पक्ष में है और परंपरागत रूप से उसे मुस्लिम वोट मिलते रहे हैं।

असम और तमिलनाडु में क्या है स्थिति?

  • असम: 126 विधानसभा सीटों में से 30 सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कांग्रेस और उसकी सहयोगी एआईयूडीएफ इस विधेयक का विरोध कर रही हैं, जिससे उन्हें मुस्लिम वोटों का फायदा मिल सकता है।

  • केरल: 140 विधानसभा सीटों में से 35 से अधिक सीटों पर मुस्लिम मतदाता प्रभाव डाल सकते हैं। यहां कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को फायदा हो सकता है, जबकि वामपंथी पार्टियों को भी मुस्लिम वोटों का समर्थन मिलता रहा है।

  • तमिलनाडु: 234 विधानसभा सीटों वाले इस राज्य में मुस्लिम आबादी 6% है, जो डीएमके और एआईएडीएमके दोनों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

कांग्रेस और विपक्ष पर असर

वक्फ विधेयक भारतीय राजनीति में अगले एक साल तक एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना रहेगा। आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को इससे लाभ हो सकता है, लेकिन यह तय नहीं है कि मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन से ही कांग्रेस सत्ता हासिल कर पाएगी। कुल मिलाकर, वक्फ बिल भारतीय राजनीति में बड़ा प्रभाव डाल सकता है और विपक्षी दलों के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अब देखना यह होगा कि चुनावी नतीजों पर इसका क्या असर पड़ता है।


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