लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ यूनिवर्सिटी में मंगलवार को लगातार तीसरे दिन तनाव बना रहा। एबीवीपी से जुड़े छात्र ऐतिहासिक लाल बारादरी के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने पहुंचे, गंगाजल छिड़का और धार्मिक नारे लगाए। यह कदम रविवार को कुछ मुस्लिम छात्रों द्वारा बारादरी परिसर के बाहर नमाज अदा करने के जवाब में उठाया गया, जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने जर्जर हालत का हवाला देते हुए 200 साल पुराने नवाबी दौर के इस स्मारक में स्थित मस्जिद के प्रवेश द्वार को बंद कर दिया था।
पुलिस और विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं को मौके पर रोक दिया। कुछ छात्रों को एहतियातन हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। छात्र नेताओं सौरभ सिंह बजरंगी और शशि प्रकाश का कहना था कि लाल बारादरी में कैफेटेरिया, बैंक और सामुदायिक हॉल संचालित होते हैं, न कि नियमित रूप से कोई धार्मिक स्थल। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नमाज की इजाजत दी जा सकती है तो हनुमान चालीसा पाठ पर आपत्ति क्यों।
वहीं, नमाज पढ़ने वाले छात्रों को समाजवादी छात्र सभा, नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ़ इंडिया और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन का समर्थन मिला। इन संगठनों ने मांग की कि या तो मस्जिद का प्रवेश द्वार खोला जाए या रमजान के दौरान नमाज और रोजा इफ्तारी के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए। सोमवार को बारादरी के बाहर हुए प्रदर्शन के दौरान आमने-सामने की स्थिति बनी, जिसे पुलिस ने हस्तक्षेप कर नियंत्रित किया।
विश्वविद्यालय प्रवक्ता मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ छात्रों ने विरोध के दौरान तोड़फोड़ की, जिस पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। रविवार को नमाज पढ़ने वाले और समर्थन करने वाले कुछ छात्रों का चालान भी शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका में किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने घटना में शामिल छह पूर्व छात्रों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए पुलिस से सहयोग मांगा है।