लखनऊ न्यूज डेस्क: आगरा के तत्कालीन सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार के लखनऊ स्थित आवास पर विजिलेंस की छापेमारी के दौरान करीब 45 करोड़ रुपये की संपत्ति सीज किए जाने की खबर से रायबरेली में भी हलचल मच गई है। जैसे ही कार्रवाई की जानकारी उनके पैतृक मोहल्ले तक पहुंची, नूर मार्केट स्थित मिलन सिनेमा गली में चर्चा का माहौल बन गया।
ललित कुमार का पैतृक घर नूर मार्केट के सेंहगो कोठी इलाके में है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्होंने रायबरेली के जीआईसी से पढ़ाई की थी और जिस मकान में उनका परिवार रहता था, वह उन्हें पैतृक हिस्से के रूप में मिला था।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2010-11 में ललित कुमार रायबरेली एआरटीओ कार्यालय में क्षेत्रीय निरीक्षक (आरआई) के पद पर भी तैनात रहे थे। वह करीब डेढ़ साल तक यहां कार्यरत रहे, जिसके बाद उनका तबादला हो गया। आरआई बनने से पहले वह रोडवेज में फोरमैन के पद पर कार्य कर चुके थे।
स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब तीन महीने पहले ललित कुमार रायबरेली आए थे। इस दौरान उन्होंने अपने मकान में किरायेदारों से कब्जा वापस लिया था। मकान में तीन दुकानें किराये पर थीं और इनमें से एक दुकान को लेकर किरायेदार संतोष चौधरी के साथ विवाद अदालत तक पहुंच गया था। कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने दुकान का कब्जा अपने हाथ में ले लिया।
हालांकि, विजिलेंस की कार्रवाई और कथित करोड़ों की संपत्ति की जानकारी सामने आने के बाद मोहल्ले के लोग हैरान हैं। अधिकांश लोग इस मामले में खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।