लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि और छात्रों के निष्कासन के विरोध में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने को रविवार को अभिभावकों का भी समर्थन मिला। प्रदेश के विभिन्न जिलों से कई अभिभावक सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन की जानकारी मिलने के बाद धरनास्थल पहुंचे और छात्रों की मांगों के समर्थन में आवाज उठाई।
अभिभावकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा फीस बढ़ाए जाने के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि लगातार बढ़ती शिक्षा लागत से मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना मुश्किल होता जा रहा है। उनका कहना था कि यदि फीस वृद्धि का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो कई प्रतिभाशाली छात्र केवल आर्थिक कारणों से उच्च शिक्षा से वंचित रह जाएंगे।
धरने के दौरान अभिभावकों ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से फीस वृद्धि के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षा सभी वर्गों की पहुंच में बनी रहनी चाहिए और इसके लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही छात्रों के निष्कासन के मामले की निष्पक्ष समीक्षा किए जाने की भी मांग उठाई गई।
इसी बीच नीट पेपर लीक और छात्रों के निष्कासन के मुद्दे पर एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ भी धरनास्थल पहुंचे। उन्होंने निष्कासित छात्र नेताओं प्रिंस प्रकाश, हर्षित शुक्ला और प्रेम प्रकाश से मुलाकात कर आंदोलन को समर्थन दिया। विनोद जाखड़ ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जो चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।