लखनऊ न्यूज डेस्क: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उस समय असामान्य स्थिति पैदा हो गई, जब याचिकाकर्ता प्रभाल प्रताप ने न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए खुद को "सॉवरेन" (सर्वोच्च) बताया और कहा कि वह अदालत को आदेश दे रहा है कि लखनऊ के एसीपी विकास नगर और डुप्लेक्स टेक्नोलॉजी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। इस पर पीठ ने हैरानी जताते हुए पूछा, "आप हमें आदेश दे रहे हैं?" लेकिन याचिकाकर्ता अपनी बात पर अड़ा रहा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अचानक दस्तावेजों का एक बंडल न्यायाधीशों की ओर फेंक दिया, जिससे कोर्ट रूम में कागज बिखर गए। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर उसे काबू में किया। इस दौरान उसने भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी की।
यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने से जुड़ा था, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत दायर उसकी अर्जी को निजी शिकायत (प्राइवेट कंप्लेंट) मानने के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया गया था। याचिकाकर्ता इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहा था।
हालांकि, पूरे घटनाक्रम के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ अवमानना या किसी अन्य दंडात्मक कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन ने कहा कि अदालत इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करेगी। वहीं, मामले के रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद पीठ ने पाया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है और विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी।