लखनऊ न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और इसके आसपास के इलाकों में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। मलिहाबाद क्षेत्र में बहने वाली बेहता नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाने के कारण कोनेश्वर घाट पर बना लोहे का कामचलाऊ (अस्थाई) पुल पूरी तरह जलमग्न हो गया है। पुल डूबने से मलिहाबाद नगर पंचायत और शेरपुर भौसा गांव के बीच संपर्क कट गया है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और शोकाकुल परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस प्राकृतिक आपदा और प्रशासनिक उपेक्षा से जुड़े मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर बनाया था पुल: स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे वर्षों से जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन से कोनेश्वर घाट पर पक्के पुल के निर्माण की मांग कर रहे थे। जब केवल आश्वासन मिले, तो निराश होकर ग्रामीणों ने करीब चार साल पहले आपस में चंदा इकट्ठा करके खुद यह लोहे का अस्थाई पुल बनाया था। लेकिन भारी बारिश के बाद उफान पर आई नदी में अब यह पुल पूरी तरह डूब गया है।
अंतिम संस्कार के लिए बढ़ी नई मुसीबत: कोनेश्वर घाट मलिहाबाद के सैय्यदवाड़ा, मुंशीगंज, सीतलनटोला, मोहम्डनटोला, झंडातला और बशारत तरफदार जैसे कई मोहल्लों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। परिजनों की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए शवों को इसी घाट पर लाया जाता है। पुल जलमग्न होने से अब लोगों को शव ले जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है या फिर 10 किलोमीटर का चक्कर लगाकर दुग्गबा के पानी में उतरकर जाना पड़ रहा है।
लधौसी गांव पर भी मंडराया संपर्क कटने का खतरा: बेहता नदी का उफान सिर्फ कोनेश्वर घाट तक सीमित नहीं है। गुलाबखेड़ा और लधौसी गांव के बीच ग्रामीणों द्वारा बांस-बल्ली से बनाया गया एक और अस्थाई पुल भी डूबने की कगार पर पहुंच गया है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा, तो लधौसी गांव का संपर्क भी पूरी तरह कट जाएगा और लोगों को नाव या 10 किमी दूर खालिसपुर होकर जाना पड़ेगा।
पक्के पुल के निर्माण की पुरजोर मांग: नदी पार करने के लिए जान जोखिम में डालने को मजबूर ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत पहुंचाने और दोनों स्थानों पर स्थायी व पक्के पुल के निर्माण की मांग को एक बार फिर प्रमुखता से उठाया है।