लखनऊ न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विभिन्न इलाकों में रात के समय बार-बार बत्ती गुल होने, बिजली के फॉल्ट ठीक होने में होने वाली देरी और स्थानीय लोगों के बढ़ते विरोध प्रदर्शनों ने शहर की बिजली वितरण प्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। दरअसल, बिजली विभाग में लागू की गई नई 'वर्टिकल व्यवस्था' के बाद लखनऊ की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था एक बड़े मैनपावर संकट (कर्मचारियों की कमी) से जूझ रही है, जिसके तहत कथित तौर पर लगभग 300 संविदा कर्मचारियों को हटा दिया गया या किनारे कर दिया गया है।
बिजली वितरण नेटवर्क के इस पुनर्गठन (रीस्ट्रक्चरिंग) ने ऐसे समय में लखनऊ विद्युत आपूर्ति प्रशासन (LESA) के आपातकालीन संकट प्रबंधन को कमजोर कर दिया है, जब भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग अपने चरम पर है। उत्तर प्रदेश संविदा निविदा कर्मचारी संघ के महासचिव देवेंद्र पांडेय के मुताबिक, इस फैसले का सबसे बुरा असर रात के समय देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पहले रात के समय कम से कम तीन मरम्मत टीमें सक्रिय रहती थीं, लेकिन अब कई क्षेत्रों में केवल एक ही गैंग उपलब्ध है। ऐसे में अगर एक साथ कई फॉल्ट आ जाएं, तो उपभोक्ताओं को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
इस नई व्यवस्था से पहले, सबस्टेशनों पर प्रत्येक फीडर के लिए एक समर्पित टीम होती थी, जिसमें एक लाइनमैन और दो हेल्पर शामिल होते थे। किसी बड़े ब्रेकडाउन की स्थिति में कई टीमें तुरंत काम पर लग जाती थीं, लेकिन अब कई फीडर केवल एक ही मरम्मत टीम पर निर्भर हैं, जिससे रिस्पॉन्स टाइम काफी बढ़ गया है। इसका जमीनी असर फैजुल्लागंज, आरडीएसओ, केसरीखेड़ा, मोहनलालगंज, राधाग्राम, चंदर नगर और आलमबाग जैसे इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां बार-बार बिजली गुल होने और ट्रांसफार्मर खराब होने पर देरी से काम शुरू होने के कारण लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
विभागीय सूत्रों की मानें तो इस रीस्ट्रक्चरिंग का मुख्य उद्देश्य परिचालन व्यय (ऑपरेशनल खर्च) को कम करना था, क्योंकि एक लाइनमैन और दो हेल्पर वाली एक मरम्मत टीम पर प्रति माह लगभग 36,000 रुपये का खर्च आता है। हालांकि, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे का कहना है कि कम मैनपावर के कारण जूनियर इंजीनियर और फील्ड स्टाफ भारी दबाव में काम कर रहे हैं। दूसरी ओर, अधिकारियों का तर्क है कि नई 'वर्टिकल प्रणाली' से डिजिटल सेवाओं में सुधार हुआ है और उपभोक्ताओं को टोल-फ्री हेल्पलाइन 1912 पर शिकायत दर्ज कराते ही मोबाइल पर सीधे अपडेट और अलर्ट मिल रहे हैं।