लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने, दरारें आने और सड़क की ऊपरी परत खराब होने का मामला अब जांच के घेरे में है। ठेकेदार कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक ने इन समस्याओं के पीछे भारी बारिश को वजह बताया था। लेकिन अब लखनऊ और उन्नाव में इस मानसून सामान्य से कम बारिश होने के आंकड़ों ने कंपनी के इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक्सप्रेसवे के 45 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हिस्से का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था और 14 जुलाई से इसे वाहनों के लिए खोल दिया गया था। इसके बाद कई जगह सड़क धंसने और सतह खराब होने की शिकायतें सामने आईं। मामले की जांच के लिए आईआईटी खड़गपुर की टीम, प्रोफेसर के. सुधाकर रेड्डी के नेतृत्व में, एक्सप्रेसवे के सात अलग-अलग स्थानों से करीब 50 सैंपल ले चुकी है।
लखनऊ में 29%, उन्नाव में 43% कम बारिश
भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 10 अगस्त के बीच लखनऊ में 269 MM बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 380 MM रहती है। यानी यहां सामान्य से करीब 29% कम बारिश हुई।
वहीं एक्सप्रेसवे के बड़े हिस्से वाले उन्नाव में सामान्य से भी कम बारिश हुई। यहां इस अवधि में 206.3 MM बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 360.4 MM है। यानी उन्नाव में बारिश सामान्य से करीब 43% कम रही।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर सामान्य से काफी कम बारिश में ही नई सड़क के कुछ हिस्से धंसने लगे और उनमें दरारें आ गईं, तो सामान्य या ज्यादा बारिश होने वाले साल में एक्सप्रेसवे की स्थिति क्या होगी।
IIT खड़गपुर की टीम कर रही कई स्तर पर जांच
यूपी एनएचएआई के चीफ रीजनल ऑफिसर गौतम विशाल के मुताबिक, आईआईटी खड़गपुर की टीम ने सात स्थानों से करीब 50 सैंपल लिए हैं। टीम सड़क के खराब हिस्सों के अलावा ड्रेनेज सिस्टम, बारिश के पानी की निकासी, सड़क की परतों में पानी जाने, सबग्रेड की मजबूती और सड़क की मोटाई व निर्माण सामग्री की भी जांच कर रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, टीम ने बारिश से जुड़े रिकॉर्ड भी मांगे हैं। इन आंकड़ों को सड़क के खराब होने वाले स्थानों, ड्रेनेज व्यवस्था और निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड के साथ मिलाकर देखा जाएगा।
मिट्टी से लेकर सड़क की परतों तक जांच
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि सड़क के नीचे की मिट्टी को सही तरीके से तैयार और दबाया गया था या नहीं। इसके अलावा निर्माण में इस्तेमाल सामग्री तय मानकों के अनुसार थी या नहीं और सड़क की अलग-अलग परतों में जरूरी मजबूती हासिल हुई थी या नहीं, इसकी भी जांच हो रही है।
विशेषज्ञ यह भी पता लगा रहे हैं कि कहीं बार-बार की गई पैचिंग से सिर्फ ऊपर की समस्या तो नहीं छिपाई गई, जबकि असली खराबी सड़क के अंदर मौजूद हो।
PNC इंफ्राटेक ने बारिश को बताया वजह
पीएनसी इंफ्राटेक ने स्टॉक एक्सचेंज को दिए जवाब में सड़क को हुए नुकसान को भारी बारिश से जोड़ते हुए अपना पक्ष रखा है। कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि सड़क की गुणवत्ता अच्छी है, लेकिन कुछ हिस्सों में सड़क के किनारों पर जमा पानी अंदर चला गया, जिससे सड़क की ऊपरी परत कमजोर होकर टूट गई।
हालांकि, बारिश के आंकड़ों के सामने आने के बाद अब यह सवाल जांच का अहम हिस्सा बन गया है कि सड़क खराब होने की असली वजह बारिश थी या बारिश ने पहले से मौजूद किसी निर्माण या ड्रेनेज की कमजोरी को उजागर किया।
टोल वसूली अभी भी बंद
सड़क को हुए नुकसान के बाद एनएचएआई ने टोल वसूली रोक दी है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। अधिकारियों के मुताबिक एक्सप्रेसवे पर दोनों दिशाओं से यातायात शुरू हो चुका है, लेकिन कुछ हिस्सों में मरम्मत का काम अभी जारी है।
गौतम विशाल ने बताया कि एक्सप्रेसवे पूरी तरह तैयार होने तक टोल वसूली शुरू नहीं की जाएगी।
अब आईआईटी खड़गपुर की जांच रिपोर्ट से यह साफ होने की उम्मीद है कि एक्सप्रेसवे पर बार-बार सड़क धंसने की वजह वास्तव में बारिश थी या निर्माण, ड्रेनेज, मिट्टी और सड़क की मजबूती से जुड़ी कोई खामी। असली सवाल यही है—बारिश ने सड़क को नुकसान पहुंचाया या बारिश ने पहले से कमजोर सड़क की पोल खोल दी?