लखनऊ न्यूज डेस्क: हाल ही में शुरू हुए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सफर कर रहे लोगों को पूरी तरह बेहतर सड़क का अनुभव मिलने में अभी करीब तीन महीने और लग सकते हैं। मानसून की पहली बारिश में ही एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में सड़क की ऊपरी सतह खिसकने, किनारों पर कटाव और गड्ढे जैसी समस्याएं सामने आने के बाद मरम्मत और रखरखाव का काम तेज कर दिया गया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों के अनुसार, मरम्मत कार्य के चलते उन्नाव और कानपुर से लखनऊ जाने वाले वाहनों का करीब छह किलोमीटर हिस्से में डायवर्जन किया गया है। भारी मशीनों से चल रहे काम के कारण यह व्यवस्था 7 अगस्त तक जारी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि बारिश के दौरान जहां-जहां कमजोरियां सामने आएंगी, वहां अगले तीन महीने तक लगातार सुधार कार्य किया जाएगा।
करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे का निर्माण पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड ने किया है। शुरुआती जांच में सड़क की ऊपरी परत में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई है। हालांकि अब तक तीन जगह सड़क की सतह खिसकने की घटनाएं सामने आई हैं, जबकि उन्नाव प्रवेश से करीब 10 किलोमीटर पहले 300 मीटर लंबे हिस्से को दोबारा बनाया जा रहा है।
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल ने बताया कि लगातार बारिश के कारण मरम्मत वाले हिस्से में नमी पहुंच गई थी। एहतियात के तौर पर पूरे सेक्शन का दोबारा निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे की मुख्य संरचना सुरक्षित है और यात्रियों के लिए किसी तरह का खतरा नहीं है। साथ ही अंडरपास, पुलिया और ओवरब्रिज वाले हिस्सों की भी दोबारा तकनीकी जांच की जा रही है।
इस बीच 28 जुलाई को एनएचएआई ने निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर और गुणवत्ता की निगरानी कर रहे दो स्वतंत्र इंजीनियरों को दो साल के लिए भविष्य की परियोजनाओं से प्रतिबंधित कर दिया था। सड़क में आई खामियों की तकनीकी जांच अभी जारी है।
मंगलवार को निरीक्षण के दौरान 64 किलोमीटर के पास सड़क की सतह पर एक नई दरार भी दिखाई दी। इसके अलावा कई स्थानों पर सड़क के किनारों का कटाव और बड़े गड्ढे देखे गए, जिससे सड़क किनारे वाहन रोकने वाले चालकों के लिए भी जोखिम बढ़ गया है।
पूर्व मुख्य अभियंता अरुण कुमार सिन्हा का कहना है कि एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में बिना मरम्मत वाले स्थानों पर भी सफर के दौरान झटके महसूस हो रहे हैं। उनका मानना है कि इन तकनीकी कमियों की विस्तृत जांच होनी चाहिए। वहीं एक ट्रक चालक ने बताया कि सड़क किनारे वाहन खड़ा करने पर उसके ट्रक के पहिए धंस गए, जिसके बाद उसे क्रेन बुलानी पड़ी।