लखनऊ न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार (17 फरवरी 2026) को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का पुलिस से टकराव हुआ। यह घटना भाजपा सरकार के खिलाफ आयोजित विरोध मार्च के दौरान हुई, जिसमें कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के कमजोर किए जाने, वाराणसी के डल मंडी जैसी ऐतिहासिक जगहों के ध्वंस, राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था की गिरावट के खिलाफ अपनी आवाज उठाई।
कांग्रेस के सदस्यों ने विधानसभा तक पहुंचकर अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया और लखनऊ के ईको गार्डन में ले जाया गया। अजय राय ने इसे लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया और आरोप लगाया कि पुलिस ने महिलाओं सहित शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता की। उन्होंने कहा कि इस अत्याचार का हिसाब 2027 में जनता लेगी और कांग्रेस जनता के हितों के लिए लड़ाई जारी रखेगी।
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि भाजपा सरकार की पुलिस ने उनके प्रदर्शन को दबाने के लिए कार्यकर्ताओं को जबरदस्ती ईको गार्डन में बैठा दिया, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं, महिलाओं, किसानों और मजदूरों की आवाज दबाई जा रही है, लेकिन कांग्रेस उनका प्रतिनिधित्व करते हुए विरोध जारी रखेगी। वरिष्ठ नेता और राजसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने भी कहा कि हजारों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अनावश्यक बल प्रयोग किया।
इससे पहले, 16 फरवरी की शाम से ही राज्य कांग्रेस मुख्यालय के आसपास बैरिकेड लगाए गए थे और कई नेताओं को अलग-अलग जिलों में ‘हाउस अरेस्ट’ किया गया था ताकि वे राजधानी में विरोध मार्च में शामिल न हो सकें। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार की यह कार्रवाई ग्रामीण रोजगार प्रणाली और जनता के अधिकारों के खिलाफ है, लेकिन पार्टी के कार्यकर्ता डरे नहीं हैं और सड़क पर अपनी सक्रियता से दिखा रहे हैं कि कांग्रेस का युग लौट आया है।