लखनऊ न्यूज डेस्क: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने लखनऊ जिला अदालत परिसर में दिल्ली के तीन वकीलों, जिनमें दो महिला अधिवक्ता शामिल हैं, और उनके मुवक्किल के साथ कथित मारपीट के मामले को स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेकर जनहित याचिका (PIL) में बदल दिया है। मामले में अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया गया है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने लखनऊ के जिला जज और पुलिस आयुक्त की रिपोर्ट, घटना से जुड़ी एफआईआर, पीड़ित पक्ष की ओर से प्रस्तुत वीडियो और जिला जज द्वारा उपलब्ध कराए गए सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन करने के बाद यह फैसला लिया। अदालत ने कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है और इसे अलग जनहित याचिका के रूप में सुना जाएगा।
यह मामला मंगलवार शाम 7 बजे विशेष सुनवाई के दौरान अदालत के सामने आया था। दिल्ली की अधिवक्ता अभिप्सा मोहंती, कोमल अग्रवाल और आशुतोष श्रीवास्तव ने आरोप लगाया था कि 21 जुलाई को लखनऊ जिला अदालत में एक सिविल मामले में वकालतनामा दाखिल करने के दौरान उन्हें एक अधिवक्ता और उसके साथियों ने न केवल रोक दिया, बल्कि उनके साथ मारपीट भी की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल मोहम्मद शाकिर के साथ भी बेरहमी से मारपीट की गई और धमकी दी गई।
सुनवाई के दौरान अदालत में घटना का वीडियो चलाया गया। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि वीडियो में कुछ अधिवक्ता, जिनके नाम शिकायत में हैं, एक व्यक्ति के साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं, जिसकी पहचान पीड़ित पक्ष ने मोहम्मद शाकिर के रूप में की है।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल आपराधिक कृत्य ही नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप का भी गंभीर मामला है। इसी के चलते अदालत ने पहले जिला जज से सीसीटीवी फुटेज सहित रिपोर्ट और पुलिस आयुक्त से आरोपित अधिवक्ताओं के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी मांगी थी।
बुधवार को हुई सुनवाई में पीड़ित अधिवक्ताओं, राज्य सरकार, सीबीआई, अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा, तथा सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव की ओर से दलीलें पेश की गईं। मामले में अंतरिम आदेश फिलहाल सुरक्षित रखा गया है।