लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ में नदवा कॉलेज के मौलाना इरफान अहमद रिजवी की हत्या की कथित साजिश के मामले में नया विवाद खड़ा हो गया है। मामले में गिरफ्तार छह आरोपियों में शामिल फरहान सिद्दीकी, सोहेल अहमद सिद्दीकी और अमन कुरैशी को जेल भेजे जाने के अगले ही दिन जमानत मिल गई। जेल से बाहर निकलते ही समर्थकों ने तीनों का फूल-मालाओं से स्वागत किया। इसके बाद तीनों आरोपी लग्जरी गाड़ियों के काफिले में घर पहुंचे और इस दौरान बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
बताया जा रहा है कि तीनों को पहले एसीजेएम-2 कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। इसके बाद एसीजेएम-3 कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बेल से पहले जांच अधिकारी से केस डायरी नहीं मंगाई गई और पुलिस को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भी नहीं दिया गया। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद एडीसीपी जितेंद्र दुबे ने कहा कि जमानत अदालत का फैसला है और पुलिस अपनी कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की जांच कर रही है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब हजरतगंज पुलिस ने चोरी की बाइक के साथ मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद जमीर को पकड़ा था। पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर मौलाना की हत्या के लिए दो लाख रुपये की सुपारी मिलने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने अमन कुरैशी को गिरफ्तार किया। जांच में आरोप सामने आया कि सोहेल और फरहान ने शूटरों से संपर्क कर उन्हें मौलाना की तस्वीर, अलग फोन और सिम उपलब्ध कराए थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से पिस्टल और पांच कारतूस बरामद करने का भी दावा किया है।
पुलिस के मुताबिक, हत्या की साजिश के पीछे करीब छह करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद वजह हो सकता है। इस मामले में मदरसा जामिया अलनूर अल सलामिया के मैनेजर बिलाल हाशमी और दोनों कथित शूटर अभी जेल में हैं। वहीं, तीन आरोपियों के इतनी जल्दी जमानत पर बाहर आने और उसके बाद समर्थकों के साथ काफिले में शक्ति प्रदर्शन करने का वीडियो सामने आने से मामले ने नया तूल पकड़ लिया है। अब सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को लेकर पुलिस की कार्रवाई और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।