लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ की स्थानीय अदालत ने 2018 में हुए एप्पल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की मौत के मामले में गुरुवार को कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी को हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी ठहराया। वहीं, पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर उसके साथी कॉन्स्टेबल संदीप कुमार को बरी कर दिया गया। कोर्ट ने जेल में बंद प्रशांत को 21 सितंबर को पेश करने का निर्देश दिया है। इसी दिन उसकी सजा कितनी होगी, इस पर सुनवाई की जाएगी।
कोर्ट ने ट्रायल के दौरान सामने आए सबूतों के आधार पर कहा कि प्रशांत के खिलाफ विवेक तिवारी को मारने की पहले से कोई योजना या मकसद साबित नहीं हुआ। अदालत के मुताबिक, यह घटना अचानक हुए टकराव के दौरान हुई थी, इसलिए प्रशांत पर हत्या का आरोप साबित नहीं होता। अभियोजन के मुताबिक, 29 सितंबर 2018 की रात करीब 1:40 बजे विवेक अपनी कार से सहकर्मी सना खान के साथ घर लौट रहे थे। गोमतीनगर एक्सटेंशन स्थित सरयू अपार्टमेंट के पास दोनों पुलिसकर्मियों ने उनकी कार रोकने की कोशिश की थी।
आरोप था कि प्रशांत चौधरी ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से विवेक पर गोली चला दी, जबकि संदीप कुमार ने सना खान के साथ कथित तौर पर डंडे से मारपीट की और कार के बोनट पर वार किया। गोली लगने के बाद विवेक को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सना खान ने सुबह करीब 5 बजे गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि पुलिसकर्मियों ने उनकी कार रोकने की कोशिश की और उनमें से एक ने अचानक गोली चला दी। उसी दिन शाम करीब 7 बजे विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी ने भी दोनों पुलिसकर्मियों को नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज कराई।
कल्पना के वकील प्रांशु अग्रवाल के मुताबिक, पुलिस ने 19 दिसंबर 2018 को प्रशांत के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 और संदीप के खिलाफ धारा 323 के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 24 दिसंबर को मामले का संज्ञान लिया और केस को सेशन कोर्ट भेज दिया। इसके बाद 22 मार्च 2019 को तत्कालीन अपर जिला जज संजय शंकर पांडेय ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। अब अदालत ने प्रशांत को गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी माना है, जबकि संदीप को सबूतों की कमी के चलते बरी कर दिया।