लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के रायपुर भदेशवा गांव में एक मकान में चल रही प्रार्थना सभा को लेकर रविवार को हंगामा हो गया। बजरंग दल और श्रीराम सनातन सेवा समिति के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सभा की आड़ में गरीब ग्रामीणों को कथित तौर पर लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। सूचना पर पहुंची पुलिस पादरी चंद्रिका प्रसाद समेत कुछ लोगों को पूछताछ के लिए थाने ले गई।
हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं का दावा है कि मौके से एक डायरी और कुछ धार्मिक किताबें मिली हैं। आरोप है कि डायरी में ग्रामीणों को दो बकरी देने और घर में पानी की टंकी बनवाने जैसे कथित प्रलोभनों का जिक्र था। कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पादरी लोगों के बीच हिंदू नाम का इस्तेमाल कर उन्हें भ्रमित करता था।
हालांकि, पुलिस की शुरुआती पूछताछ में सभा में मौजूद लोगों ने कहा कि वे अपनी इच्छा से वहां आए थे। थाना प्रभारी के मुताबिक, इस स्थान पर वर्ष 2009-10 से चर्च या प्रार्थना सभा संचालित होने की जानकारी सामने आई है। घटना के समय वहां करीब चार-पांच लोग मौजूद थे। पुलिस का कहना है कि अभी तक किसी व्यक्ति ने जबरन धर्मांतरण या किसी तरह के प्रलोभन को लेकर लिखित शिकायत नहीं दी है।
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज करने में टालमटोल की। उनका कहना है कि पुलिस ने किसी प्रत्यक्ष पीड़ित के सामने आने के बाद ही कार्रवाई करने की बात कही। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इसी बीच अखिल भारत हिंदू महासभा ने भी प्रदेश में धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून की मांग उठाई है। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजकर आरोप लगाया कि कुछ इलाकों में चंगाई सभा के नाम पर धर्मांतरण कराया जा रहा है।
संगठन ने दावा किया कि गरीब, मजदूर और वंचित वर्ग के लोगों को नौकरी, इलाज, शिक्षा और आर्थिक मदद का कथित लालच दिया जाता है। साथ ही बिना प्रशासनिक अनुमति के चर्च और प्रार्थना सभाएं आयोजित किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।