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पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने वाला पति ही निकला हत्यारा, प्रेमिका संग रची साजिश

Photo Source : Google

Posted On:Monday, August 3, 2026

लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ में पत्नी की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने वाला ओला कैब चालक ही उसकी हत्या का मुख्य आरोपी निकला। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपनी प्रेमिका के साथ मिलकर पत्नी की हत्या की और फिर सबूत मिटाने के लिए शव को गोमती नदी में फेंक दिया। मामले का खुलासा तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन की मदद से हुआ।

आरोपी उमेंद्र प्रताप सिंह (31) ने 31 जुलाई को रहीमाबाद थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी पत्नी अंजलि सिंह 30-31 जुलाई की रात घर से जेवर लेकर लापता हो गई है। इसी दौरान इटौंजा क्षेत्र में गोमती नदी से एक महिला का शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान बाद में अंजलि के रूप में हुई। इसके बाद मामला गुमशुदगी से हत्या में बदल गया।

अंजलि के भाई ने उमेंद्र पर हत्या का आरोप लगाया, जिसके बाद पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। जांच में पुलिस को पति की कहानी पर संदेह हुआ और आखिरकार 1 अगस्त की रात अडौरा मोड़ के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में पुलिस के अनुसार, उमेंद्र ने अपनी कथित प्रेमिका आरती वर्मा (31) के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी। अंजलि को दोनों के संबंधों की जानकारी हो गई थी और वह इसका विरोध कर रही थी। आरोप है कि 30 जुलाई की रात दोनों ने अंजलि का मुंह और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

हत्या के बाद आरोपी दंपती ने शव को स्विफ्ट डिजायर कार में रखकर इटौंजा ले जाकर गोमती नदी में फेंक दिया, ताकि पहचान और जांच में देरी हो सके। इसके बाद उमेंद्र घर लौटा, अंजलि के जेवर इकट्ठा कर आरती को सौंप दिए और फिर थाने पहुंचकर गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के मुताबिक, यह पूरी कहानी जांच को गुमराह करने और यह दिखाने के लिए रची गई थी कि अंजलि खुद जेवर लेकर घर छोड़कर चली गई है।

जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से अंजलि के 32 सोने-चांदी के आभूषण, दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन और हत्या के बाद शव ले जाने में इस्तेमाल की गई स्विफ्ट डिजायर कार बरामद हुई। बरामद जेवरों की कीमत करीब 8 से 10 लाख रुपये बताई जा रही है।

फिलहाल दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्य जुटाने के साथ-साथ उमेंद्र के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, उसके खिलाफ वर्ष 2020 में हरदोई में मारपीट का एक मामला भी दर्ज हो चुका है।


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