लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआई) परिसर से 21 वर्षीय युवती के लापता होने और कथित धर्मांतरण के आरोपों से जुड़ा मामला तूल पकड़ता जा रहा है। परिवार ने आरोप लगाया है कि इरशाद अली नामक युवक युवती का धर्म परिवर्तन कराना चाहता था और उसे सीरिया ले जाने की धमकी भी देता था। मामले में पीजीआई से जुड़े एक डॉक्टर पर आरोपी को संरक्षण देने के आरोप भी लगाए गए हैं, जिसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
मामले के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है। युवती की तलाश के लिए तीन विशेष टीमों का गठन किया गया है, जबकि आरोपी इरशाद अली की गिरफ्तारी के लिए सर्विलांस की मदद ली जा रही है। पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। वहीं, संदेह के घेरे में आए डॉक्टर से भी पूछताछ की जा रही है और जांच पूरी होने तक उन्हें शहर छोड़ने से मना कर दिया गया है। इसके चलते उनके सिंगापुर में प्रस्तावित कार्यक्रम में शामिल होने पर भी रोक लग गई है।
परिवार के अनुसार, युवती 21 मई 2026 को नौकरी से संबंधित कार्य के लिए तेलीबाग स्थित बी-2 मार्केट गई थी, लेकिन इसके बाद घर वापस नहीं लौटी। परिजनों का कहना है कि युवती की गतिविधियां सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई हैं और पुलिस फुटेज की जांच कर रही है। शिकायत में कहा गया है कि इरशाद अली पहले से परिवार के संपर्क में था और उसका घर में आना-जाना भी था। परिवार का आरोप है कि पहले भी उसके खिलाफ शिकायत की गई थी, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
परिजनों का दावा है कि इरशाद अली ने रक्षाबंधन के अवसर पर युवती से राखी बंधवाई थी और बाद में उसका घर में आना-जाना बढ़ गया। आरोप है कि उसने युवती को फोन पर परेशान करना शुरू किया और उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें भी बना लीं। विरोध करने पर उसने युवती को सीरिया ले जाने जैसी बातें कहीं। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।