लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ के अलीगंज में पुलिस ने एक फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, यहां बैठे आरोपी विदेशी लोगों को फोन करके खुद को एफबीआई, एफडीआई, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी बड़ी कंपनियों का अधिकारी बताते थे। इसके बाद डर दिखाकर उनसे पैसे वसूलते थे। पुलिस ने इस मामले में 16 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि कॉल सेंटर का मुख्य आरोपी शिवा उर्फ प्रियांशु कुशवाहा फरार है। पुलिस ने कुल 17 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी नेक्सोलाने सॉल्यूशन नाम से कॉल सेंटर चला रहे थे। पहले विदेशी नागरिकों के कंप्यूटर या मोबाइल पर फर्जी पॉप-अप भेजा जाता था। इसमें कंप्यूटर हैक होने या किसी बड़ी समस्या का अलर्ट दिखता था। पॉप-अप में दिए नंबर पर फोन करने के बाद आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट का टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बताते थे। फिर अल्ट्राव्यूअर जैसे सॉफ्टवेयर की मदद से पीड़ित के कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस ले लेते थे। इसके बाद फर्जी जांच करके उन्हें बताया जाता था कि उनके कंप्यूटर से अश्लील वेबसाइट या चाइल्ड पोर्नोग्राफी और ड्रग्स जैसी गैरकानूनी गतिविधियां हुई हैं।
डरने के बाद पीड़ित से गिरोह की दूसरी टीम संपर्क करती थी। पहले वेरिफायर जानकारी की पुष्टि करते और फिर क्लोजर टीम मामला संभालती थी। क्लोजर टीम के सदस्य खुद को एफबीआई या अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते थे। मामला खत्म करने के नाम पर उनसे पैसे मांगे जाते थे। पुलिस के मुताबिक, ठगी की रकम गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी, डॉलर और सोने के रूप में ली जाती थी। ऑनलाइन पैसे भेजना संभव नहीं होने पर अमेरिका में मौजूद एजेंटों को डॉलर या सोना भेजने के लिए कहा जाता था।
पुलिस ने कॉल सेंटर से 36 लैपटॉप, 20 मोबाइल, 5 वाई-फाई राउटर, 22 हेडफोन, 20 माउस और 32 लैपटॉप चार्जर बरामद किए हैं। आरोपियों में गुजरात, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और यूपी के लोग शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, कर्मचारियों को हर महीने 18 से 30 हजार रुपये दिए जाते थे और रहने-खाने की सुविधा भी मिलती थी। अब पुलिस फरार सरगना शिवा उर्फ प्रियांशु कुशवाहा की तलाश के साथ पूरे नेटवर्क और पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है। पुलिस टीम को 25 हजार रुपये और कांस्टेबल विपिन कुमार वर्मा को 5 हजार रुपये का इनाम दिया गया है।