लखनऊ न्यूज डेस्क: लखनऊ में आवास विकास परिषद की योजना में प्लॉट दिलाने के नाम पर एक कारोबारी से करीब 2.35 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। रुचिखंड-1, शारदानगर निवासी कारोबारी अविहर्ष शुक्ला ने पीजीआई थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने यशवंत सिंह नाम के व्यक्ति पर खुद को आवास विकास परिषद का कर्मचारी बताकर ठगी करने का आरोप लगाया है।
अविहर्ष के मुताबिक, वर्ष 2023 में चार्टर्ड अकाउंटेंट अक्षय गुप्ता के जरिए उनकी मुलाकात यशवंत सिंह से हुई थी। यशवंत ने दावा किया कि आवास विकास परिषद के अधिकारियों से उसके करीबी संबंध हैं और वह परिषद की योजना में उन्हें प्लॉट आवंटित करा सकता है।
आरोप है कि यशवंत अक्सर आवास विकास परिषद के मुख्यालय के आसपास मिलता था और वहीं पैसों का लेन-देन करता था। उसकी बातों पर भरोसा करके अविहर्ष ने अलग-अलग तारीखों पर प्लॉट आवंटन के नाम पर उसे रकम देना शुरू किया।
2.35 करोड़ रुपये लेने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, यशवंत ने कुल 2,35,78,374 रुपये लिए। इसमें 2,86,187 रुपये के दो मोबाइल फोन भी शामिल हैं। आरोप है कि यशवंत ने ये फोन आवास विकास परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों को देने के नाम पर लिए थे।
शिकायतकर्ता के अनुसार, एक आईफोन 15 प्रो और एक सैमसंग गैलेक्सी फोल्ड 6 उनके नाम पर खरीदे गए थे और दोनों के बिल भी उनके पास हैं।
बाकी 2,32,92,187 रुपये नकद और यशवंत के परिचितों या संबंधित फर्मों के बैंक खातों में जमा कराने का आरोप है। इनमें पूजा एंटरप्राइजेज और समरेश यादव से जुड़े खाते शामिल बताए गए हैं। अविहर्ष का दावा है कि 4 जुलाई 2024 को उन्होंने 85 लाख रुपये नकद भी दिए थे। इस लेन-देन का प्रमाण स्टाम्प पेपर पर यशवंत के हस्ताक्षर के रूप में मौजूद होने की बात कही गई है।
फर्जी मोहर और दस्तावेज से बनाया भरोसा
रकम लेने के बाद यशवंत ने कथित तौर पर अविहर्ष को आवास विकास परिषद के आवंटन पत्र और दूसरे दस्तावेज दिए। बाद में जब इन दस्तावेजों की जांच कराई गई तो वे फर्जी और कूटरचित पाए गए।
आरोप है कि दस्तावेजों पर फर्जी सरकारी मोहरों का इस्तेमाल किया गया था। जांच के दौरान यह भी पता चला कि यशवंत आवास विकास परिषद का कर्मचारी नहीं है और शिकायतकर्ता के नाम पर परिषद की ओर से कोई प्लॉट आवंटित ही नहीं हुआ था।
पैसे वापस मांगने पर धमकी का आरोप
अविहर्ष का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो यशवंत पहले उन्हें लगातार टालता रहा। बाद में कथित तौर पर उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने, जेल भिजवाने और जान से मारने की धमकी दी गई।
शिकायतकर्ता ने आरोपी की कई ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का भी दावा किया है। उनका कहना है कि जरूरत पड़ने पर इन रिकॉर्डिंग को पुलिस जांच में साक्ष्य के तौर पर उपलब्ध कराया जाएगा।
शिकायत में पूरे मामले को पूर्व नियोजित साजिश बताते हुए धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने समेत अन्य संबंधित धाराओं में कार्रवाई की मांग की गई है। पीजीआई थाने में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।